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आज के दौर में तटस्थता असांस्कृतिक और अभारतीय हैः अशोक वाजपेयी

Share this on WhatsApp‘‘अतताई को नींद न आये – इतना तो करना ही होगा। आज तटस्थता संभव नहीं है। तटस्थता असांस्कृतिक और अभारतीय है। हमें हिम्मत और हिमाकत की जरूरत है। हमारी सार्थकता इसी में है कि हम आज के समय के विरूद्ध बोल रहे हैं। आवश्यकता है कि इप्टा के …

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हमें सोचना होगा कि बम शक्ति बढ़ाते हैं या हमें ख़तरे में डालते हैंः गौहर रज़ा

Share this on WhatsApp‘‘अगर भारत-पाकिस्तान के बीच जंग होती है और वह जंग एटमी हो जाती है तो कोई नहीं बचेगा। न हिन्दुस्तान-पाकिस्तान की आवाम और न ही बांग्लादेश और दक्षिण एशियाई देश नागरिक। और अब तो न्यूट्राॅन बम आ गये हैं, जो इंसान के द्वारा बनाई गई सबसे डरावनी और घिनौनी चीज …

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राष्ट्रीय नाट्य समारोह में छह नाटकः दिल को झकझोरने वाले नाटक

Share this on WhatsAppजब भी बिहार क्या हिन्दुस्तान में भी रंगमंच, नाट्यकर्म एवं साझा सांस्कृतिक विरासत की रक्षा की चर्चा होगी बिहार इप्टा के अख़्तर भाईयों के नाम जुबान पर अपने आप आ जाएंगे। आज जबकि पश्चिम संस्कृति की चपेट में आकर हिन्दुस्तान की मूल संस्कृति कराह रही है तब भी …

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जातियों के विनाश किये बिना देश का लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकताः उर्मिलेश

Share this on WhatsApp‘आज हम आईडिया आॅफ इंडिया के खतरे को लेकर चितिंत हैं। परन्तु जब हिन्दुस्तान आज़ाद हो रहा था और आज़ादी के बाद भी एक साथ चार-पाँच माॅडल विमर्श में थें। पहला माॅडल गाँधी-नेहरू का था, दूसरा वामपंथियों का था, तीसरा भगत सिंह और उनके साथियों, चौथा अम्बेदकर का था। …

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रंगकर्मी समाज को ख़तरों से आगाह करेंः कैफी

Share this on WhatsAppजिन उद्देश्यों के तहत आज से लगभग 50 वर्ष पूर्व इप्टा का गठन हुआ था, आज उससे कहीं ज्यादा इसकी जरूरत है। अंग्रेज चले गये, आजादी भी मिल गयी लेकिन हमें कई लड़ाईयां अभी लड़नी हैं। इप्टा ने गीतों और नाटकों को हथियार बनाकर इस लड़ाई में अपनी …

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